Wednesday, June 2, 2010

बनकर गीत सुधारस आना




जब नीरस हो जाए जीवन ,
जब मिठास खो दे मेरा मन ,
तुम करुणा-धारा बन जाना
-बनकर गीत सुधारस आना ।।

कर्मों के कोलाहल काले,
मन के मछुआरों ने डाले-
पलपल मछलीवाले जाले,
पर तुम मेरा साथ निभाना
दबे पांव चुपके से आना।।
-बनकर गीत सुधारस आना।।

पड़ा दीन-हीन गुरु गौरव,
निर्बल,निर्जन,निष्क्रिय,नीरव,
मारक है पीड़ा का रौरव,
शब्दों की संजीवनी लाना।
मरता हूं तुम मुझे जिलाना।।
-बनकर गीत सुधारस आना।।


धूल हो गई अतुल कामना,
हुई अपाहिज वीर-वासना,
विफल हो गई स्वार्थ-साधना,
प्रिय! बिखरे स्वर पुनः सजाना।
तार-तार वीणा पर गाना।।
-बनकर गीत सुधारस आना।।
23-24.05.10

9 comments:

  1. धूल हो गई अतुल कामना,
    हुई अपाहिज वीर-वासना,
    विफल हो गई स्वार्थ-साधना,
    प्रिय! बिखरे स्वर पुनः सजाना।
    तार-तार वीणा पर गाना।।
    -बनकर गीत सुधारस आना।।

    अतिसुन्दर

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  2. बहुत भाव पूर्ण गीत है. शब्द, भाषा, लय सब ही कुछ अपनी गति से बढ़ता हुआ इस गीत को एक अद्वितीय संगीत देता सा जान पड़ता है आभार

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  3. Bau jee,
    Jitni samajh aayee, achhi lagi!
    Baaki saari raat zor lagaunga, shayad samajh aa jaaye!
    Saadar Pranaam!

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  4. धूल हो गई अतुल कामना,
    हुई अपाहिज वीर-वासना,
    विफल हो गई स्वार्थ-साधना,
    प्रिय! बिखरे स्वर पुनः सजाना।
    तार-तार वीणा पर गाना।।
    -बनकर गीत सुधारस आना।।

    भाव पूर्ण गीत ....!!

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  5. बहुत सुन्दर गीत

    यह पद जानदार


    कर्मों के कोलाहल काले,
    मन के मछुआरों ने डाले-
    पलपल मछलीवाले जाले,
    पर तुम मेरा साथ निभाना
    दबे पांव चुपके से आना।।
    -बनकर गीत सुधारस आना।।

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