Showing posts with label गीत.गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर. गीतांजली . भावानुगीत-4. Show all posts
Showing posts with label गीत.गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर. गीतांजली . भावानुगीत-4. Show all posts

Saturday, May 8, 2010

मैं केवल अभिव्यक्ति तुम्हारी।

भारतीय गीतों के राजऋषि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित गीत




मैं केवल अभिव्यक्ति तुम्हारी।

मेरे अंग अंग को छूकर
क्या करते हो तुम प्राणेश्वर !
नवगति ,नवमति, नवरति भरकर-
क्यों व्याकुल अनुरक्ति तुम्हारी ?
मैं केवल अभिव्यक्ति तुम्हारी।

मेरा हृदय निवास तुम्हारा
मेरा सुख विश्वास तुम्हारा
हर स्पंदन हास तुम्हारा
रोम रोम आसक्ति तुम्हारी।
मैं केवल अभिव्यक्ति तुम्हारी।

ध्यान तुम्हीं ,अवधान तुम्हीं हो
कर्मों में गतिमान तुम्हीं हो
शुभ,सद,् शिव, शुचि गान तुम्हीं हो
मेरा साहस , शक्ति तुम्हारी।
मैं केवल अभिव्यक्ति तुम्हारी।

द्वेष-मुक्त ,निष्कलुष बना दो
मुझे प्रेममय मनुष बना दो
धरती पर ही नहुष बना दो
नहीं चाहिए मुक्ति तुम्हारी।
मैं केवल अभिव्यक्ति तुम्हारी।
28.04.10


नहुष: जब इंद्र शापग्रस्त होकर अपदस्थ हुए तो धरती के नीतिवान प्रतापी राजा नहुष को इंद्र के स्थान पर इंद्रासन पर बैठाया गया था। इंद्र के लौटने पर वे स्वर्ग से पुनः धरती पर लौटाए गए। परन्तु सिद्धों ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। वे त्रिशंकु कहलाए। न इधर के रहे न उधर के। घर के न घाट के। बाद में मामला निपट गया।

*फोटो में पंजाब-कोकिला अमृता प्रीतम हैं